-पता नहीं अब हक़ है या नही, पर आज भी तेरी परवाह करना अच्छा लगता हैं ..

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दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बड़ी तड़पाती है, क्या करूँ तेरी याद ही जो इतनी आती है

मुझे इतनी याद आकर बेचैन ना करो, तुम्हारी सितम काफी है कि साथ नहीं तुम.

किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

कोई वादा नहीं फिर भी तेरे इंतज़ार में हैं, जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार हैं, तेरे चहेरे की उदासी दे रही हैं, गवाही मुझसे मिलने को तू अब भी बेकरारहैं

ये आरज़ू नहीं कि किसी को भुलाएं हम. न तमन्ना है किसी को रुलाएं हम. पर दुआ है उस रब से एक ही, जिसको जितना याद करते हैं उसको उतना याद आयें हम.

हर बात कहकर समझाई नहीं जाती, हर चीज ज़िन्दगी में पायी नहीं जाती, यु तो हर वक़्त याद करते है आपको, पर अफ़सोस यादें किसी को दिखाई नहीं जाती.

दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बड़ी तड़पाती है, क्या करूँ तेरी याद ही जो इतनी आती है

मुझे इतनी याद आकर बेचैन ना करो, तुम्हारी सितम काफी है कि साथ नहीं तुम.

किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

कोई वादा नहीं फिर भी तेरे इंतज़ार में हैं, जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार हैं, तेरे चहेरे की उदासी दे रही हैं, गवाही मुझसे मिलने को तू अब भी बेकरारहैं

ये आरज़ू नहीं कि किसी को भुलाएं हम. न तमन्ना है किसी को रुलाएं हम. पर दुआ है उस रब से एक ही, जिसको जितना याद करते हैं उसको उतना याद आयें हम.

हर बात कहकर समझाई नहीं जाती, हर चीज ज़िन्दगी में पायी नहीं जाती, यु तो हर वक़्त याद करते है आपको, पर अफ़सोस यादें किसी को दिखाई नहीं जाती.