रोज़ खवाबों क जज़ीरों में निकल जाता हूँ तुझ से मिलने की नयी राह निकाली मैंने

रोज़ खवाबों क जज़ीरों में निकल जाता हूँ तुझ से मिलने की नयी राह निकाली मैंने

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किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

तू होश में था फिर भी हमें पहचान न सका .. एक हम थे की पी कर भी तेरा नाम लेते रहे .. ‘

तेरी बे’रुखी का अंजाम एक दिन यही होगा, आखीर भुला ही देंगे तुझे याद करते करते ..

दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है..

मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना, कभी बात करने की हसरत कभी देखने की तमन्ना !!

-बे’दर्द ज़माने का बहाना सा बना कर, हम टूट के रोते हैं तेरी याद में अक्सर .. ‘

किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

तू होश में था फिर भी हमें पहचान न सका .. एक हम थे की पी कर भी तेरा नाम लेते रहे .. ‘

तेरी बे’रुखी का अंजाम एक दिन यही होगा, आखीर भुला ही देंगे तुझे याद करते करते ..

दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है..

मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना, कभी बात करने की हसरत कभी देखने की तमन्ना !!

-बे’दर्द ज़माने का बहाना सा बना कर, हम टूट के रोते हैं तेरी याद में अक्सर .. ‘