तुझे पाने की हसरत मैं कब तक तरस्ती रहूं? कोई ऐसा दे धोखा के मेरी सांस टूट जाये और जान छूट जाये ..

तुझे पाने की हसरत मैं कब तक तरस्ती रहूं? कोई ऐसा दे धोखा के मेरी सांस टूट जाये और जान छूट जाये ..

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इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर..

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

अब तो यह दिल भी आवारगी पर उतर आया कहता है. ले चल उनकी गलियो में वरना अपनी मौत का ज़िम्मेदार तू खुद होगा.

रोज़ खवाबों क जज़ीरों में निकल जाता हूँ तुझ से मिलने की नयी राह निकाली मैंने

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नहीं, बस कोई था जिस से यह उम्मीद नहीं थी!!

~सिगरेट जलाई थी उसकी याद भुलाने के लिये पर कम्भखत धुएं ने भी उसकी तस्वीर बना दी .. ‘

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर..

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

अब तो यह दिल भी आवारगी पर उतर आया कहता है. ले चल उनकी गलियो में वरना अपनी मौत का ज़िम्मेदार तू खुद होगा.

रोज़ खवाबों क जज़ीरों में निकल जाता हूँ तुझ से मिलने की नयी राह निकाली मैंने

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नहीं, बस कोई था जिस से यह उम्मीद नहीं थी!!

~सिगरेट जलाई थी उसकी याद भुलाने के लिये पर कम्भखत धुएं ने भी उसकी तस्वीर बना दी .. ‘