पता है तुम्हें, मैं बहुत बातें करता हूँ, तुम्हारी चाँद से,अक्सर रातों में. सच्ची ये और बात है, कि मैं बताता नहीं हूँ तुम्हें..
तुम्हे मिस करती हूं रोज़ मिस करती हूं बहुत मिस करती हूं तुम्हारी कसम.
बंद आँखों में मेरी चले आते हो तुम अपनों की तरह, आँख खुलते ही तुम खो जाते हो कहीं सपनो की तरह..
दिन भी ठीक से नहीं ✖गुजरता और रात भी बडी तड़पाती है,क्या❔ करू यार तेरी☝ याद ही जो इतनी आती है.
रहते हुए इस जहां मे मुद्दत गुज़र गई फिर भी अपने आप को अजनबी पता हु मैं…
दूर ही सही, किनारा तो है, टिमटिमाता ही सही, सितारा तो है, होजती है तुम्हारी याद से ही तसल्ली, तिनका ही सही सहारा तो है..
पता है तुम्हें, मैं बहुत बातें करता हूँ, तुम्हारी चाँद से,अक्सर रातों में. सच्ची ये और बात है, कि मैं बताता नहीं हूँ तुम्हें..
तुम्हे मिस करती हूं रोज़ मिस करती हूं बहुत मिस करती हूं तुम्हारी कसम.
बंद आँखों में मेरी चले आते हो तुम अपनों की तरह, आँख खुलते ही तुम खो जाते हो कहीं सपनो की तरह..
दिन भी ठीक से नहीं ✖गुजरता और रात भी बडी तड़पाती है,क्या❔ करू यार तेरी☝ याद ही जो इतनी आती है.
रहते हुए इस जहां मे मुद्दत गुज़र गई फिर भी अपने आप को अजनबी पता हु मैं…
दूर ही सही, किनारा तो है, टिमटिमाता ही सही, सितारा तो है, होजती है तुम्हारी याद से ही तसल्ली, तिनका ही सही सहारा तो है..