उसकी #Mohabbat पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, #Dil करता है के पूरी उम्र भर उसी का इंतज़ार करूँ….
ये अजीब खेल चल रहा है मेरी ज़िन्दगी में जहाँ ” याद ” का लफ्ज़ आ जाए , वहां तुम याद आ जाते हो।
आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..
रहते हुए इस जहां मे मुद्दत गुज़र गई फिर भी अपने आप को अजनबी पता हु मैं…
कोई मरता नहीं किसी के लिए, यह सच है, कोई जीता है मर मर के किसी के लिए, यह भी सच है..
~हम चाह कर भी पूछ ही नई पाते उनका हाल, डरते हैं कहीं यह न केहड़ी वह, तुम्हे यह हक किसने दिया .. ?
उसकी #Mohabbat पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, #Dil करता है के पूरी उम्र भर उसी का इंतज़ार करूँ….
ये अजीब खेल चल रहा है मेरी ज़िन्दगी में जहाँ ” याद ” का लफ्ज़ आ जाए , वहां तुम याद आ जाते हो।
आज की शाम भी क़यामत की तरह गुज़री, ना जाने क्या बात थी हर बात पे तुम याद आये ..
रहते हुए इस जहां मे मुद्दत गुज़र गई फिर भी अपने आप को अजनबी पता हु मैं…
कोई मरता नहीं किसी के लिए, यह सच है, कोई जीता है मर मर के किसी के लिए, यह भी सच है..
~हम चाह कर भी पूछ ही नई पाते उनका हाल, डरते हैं कहीं यह न केहड़ी वह, तुम्हे यह हक किसने दिया .. ?