दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है ।

दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है ।

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आप हमसे दूर क्या हुए, आपकी यादें हमारे क़रीब आने लगी..

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

कभी बदली सा बरसना कभी चाँद सा छुप जाना… उफ़्फ़् ! बहुत खलता है तेरा यूँ चुपके से चले जाना !! miss u

गम ने हंसने न दिया, जमाने ने रोने न दिया! इस उलझन ने चैन से जीने न दिया! थक के जब सितारों से पनाह ली! नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया!

तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘

हिचकियाँ दिलाकर उलझन बढ़ा रहे हो, आँखें बंद है फिर भी नज़र आ रहे हो, इतना बता दो हमें याद कर रहे हो, ये सिर्फ अपनी याद दिला रहे हो.

आप हमसे दूर क्या हुए, आपकी यादें हमारे क़रीब आने लगी..

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

कभी बदली सा बरसना कभी चाँद सा छुप जाना… उफ़्फ़् ! बहुत खलता है तेरा यूँ चुपके से चले जाना !! miss u

गम ने हंसने न दिया, जमाने ने रोने न दिया! इस उलझन ने चैन से जीने न दिया! थक के जब सितारों से पनाह ली! नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया!

तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘

हिचकियाँ दिलाकर उलझन बढ़ा रहे हो, आँखें बंद है फिर भी नज़र आ रहे हो, इतना बता दो हमें याद कर रहे हो, ये सिर्फ अपनी याद दिला रहे हो.