दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है..
जिस ने छोड़ दिया मुझी पुराने साल की तरह, उसे नया साल भी मुबारक नए यार भी मुबारक .. ‘
दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बड़ी तड़पाती है, क्या करूँ तेरी याद ही जो इतनी आती है
ना मुस्कुराने को जी चाहता है; ना आंसू बहाने को जी चाहता है. लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में; बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है.
उस से तार्रुफ़ तो करा दो मेरा ….. बस अजनबी कह के मिलाना मुझको !!!
गुजर रही है ये जिंदगी बड़े ही नाज़ुक दौर से ……!!! मिलती नहीं तसल्ली तेरे सिवा किसी और से…..!!!
दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है..
जिस ने छोड़ दिया मुझी पुराने साल की तरह, उसे नया साल भी मुबारक नए यार भी मुबारक .. ‘
दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बड़ी तड़पाती है, क्या करूँ तेरी याद ही जो इतनी आती है
ना मुस्कुराने को जी चाहता है; ना आंसू बहाने को जी चाहता है. लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में; बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है.
उस से तार्रुफ़ तो करा दो मेरा ….. बस अजनबी कह के मिलाना मुझको !!!
गुजर रही है ये जिंदगी बड़े ही नाज़ुक दौर से ……!!! मिलती नहीं तसल्ली तेरे सिवा किसी और से…..!!!