झगड़ा तभी होता है जब दर्द होता है, और दर्द तब होता है जब प्यार होता है…

झगड़ा तभी होता है जब दर्द होता है, और दर्द तब होता है जब प्यार होता है…

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हम से कोई गिला हो जाए तो सॉरी, आपको याद ना कर पाए तो सॉरी, वैसे दिल से आपको भूलेंगे नहीं, और हमारी धड़कन ही रुक जाए तो सॉरी…..

चाँद तो हमसे दूर हैं, हम तो तेरे नूर पर फ़िदा हैं, ना जाने तू रूठा क्यूँ हैं हमसे, फिर भी सजा पाने खड़े हैं कबसे..

अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.

छोटी बातों पे तकरार न किआ करो, हर मजाक को दिल पे न लिअ करो, क्या पता साथ है और कितने दिन का, इन पलो को तो प्यार से हमारे साथ जिया करो.

अरे ओ मेरी जाना ऐसे क्यों रूठ जाना…. ऐसा कौन सा हुआ फ़साना की मुझे तुझे पड़ गया मानना… अब बस भी कर मेरी जाना… बोहोत हो गया मुझे तड़पाना… थोड़ी सी तो दया दिखाना… मुझसे जो भी गिला शिकवा है उसे दूर कर जा ना… ओ मेरी जाना प्लीज मुझे माफ कर जा ना…

मिले हो आप मुझको तो दूर न जाना, कुछ पल साथ चल कर मुझे भूल न जाना, ज़िन्दगी में मुझे छोड़ न जाना, गलती हो तो माफ़ कर देना पर मुँह मोड़ न जाना.

हम से कोई गिला हो जाए तो सॉरी, आपको याद ना कर पाए तो सॉरी, वैसे दिल से आपको भूलेंगे नहीं, और हमारी धड़कन ही रुक जाए तो सॉरी…..

चाँद तो हमसे दूर हैं, हम तो तेरे नूर पर फ़िदा हैं, ना जाने तू रूठा क्यूँ हैं हमसे, फिर भी सजा पाने खड़े हैं कबसे..

अपनों को कभी सताया नहीं जाता, अपनों को कभी मनाया नहीं जाता. रूठता वही है जो आपको अपना समझे, क्यूंकि ये हक़ गैरों पे जताया नहीं जाता.

छोटी बातों पे तकरार न किआ करो, हर मजाक को दिल पे न लिअ करो, क्या पता साथ है और कितने दिन का, इन पलो को तो प्यार से हमारे साथ जिया करो.

अरे ओ मेरी जाना ऐसे क्यों रूठ जाना…. ऐसा कौन सा हुआ फ़साना की मुझे तुझे पड़ गया मानना… अब बस भी कर मेरी जाना… बोहोत हो गया मुझे तड़पाना… थोड़ी सी तो दया दिखाना… मुझसे जो भी गिला शिकवा है उसे दूर कर जा ना… ओ मेरी जाना प्लीज मुझे माफ कर जा ना…

मिले हो आप मुझको तो दूर न जाना, कुछ पल साथ चल कर मुझे भूल न जाना, ज़िन्दगी में मुझे छोड़ न जाना, गलती हो तो माफ़ कर देना पर मुँह मोड़ न जाना.