ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

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उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले

एक फ़क़ीर ने कहा था चिंता ना कर वो भी रोएगा जो आज तुझे रुला रहा है

प्यार बार बार नहीं होता, और हर यार वफ़ा दर नहीं होता

तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे

उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले

एक फ़क़ीर ने कहा था चिंता ना कर वो भी रोएगा जो आज तुझे रुला रहा है

प्यार बार बार नहीं होता, और हर यार वफ़ा दर नहीं होता

तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे