किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।

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लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है, जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है

रुलाती है मगर रोने का नहीं.

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है, जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

बुरा वक़्त दर्द नहीं देता बुरे वक़्त में साथ छोड़ने वाले दर्द देते है

रुलाती है मगर रोने का नहीं.