टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है
टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है