रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ

रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ

Share:

More Like This

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |

किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....

उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही

जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |

किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....

उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही

जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है