RESULT के बाद – न तलवार की धारसे न गोलियोंकी बौछार से, बंदा डरता हे तो सिर्फ अपने बाप की मार से ।
एक जोक जो सदयोसे स्टूडेंट बोल रहे हे और आगे भी बोलेंगे: नेक्स्ट सेमिस्टर पूरी जान लगा के पढूंगा।
इंसान पढाई सिर्फ दो वजहों से ही करता है या तो शौक से या फिर डर से, शोक हमें पढाई का है नहीं और डरते हम किसी के बाप से भी नहीं.
समंदर भर सिलेबस होता है, नदी भर पढ़ पाते हैं, बाल्टी भर याद रहता है, चुल्लू भर नंबर आते हैं, जिसमें हम डूब जाते हैं.
निर्णय लेना और असफल हो जाना!! इससे एक बात तो स्पष्ट है!! की आप उस भीड़ का हिस्सा नहीं है!! जो असफल होने के डर से निर्णय ही नहीं ले पाते है!!
ना वक्त है इतना कि Syllabus पूरा किया जाएँ!! ना तरकीब कोई की Exam पास किया जाएँ!! न जाने कोन-सा दर्द दिया है इस पढ़ाई ने!! ना रोया जाए और ना सोया जाएँ!!
RESULT के बाद – न तलवार की धारसे न गोलियोंकी बौछार से, बंदा डरता हे तो सिर्फ अपने बाप की मार से ।
एक जोक जो सदयोसे स्टूडेंट बोल रहे हे और आगे भी बोलेंगे: नेक्स्ट सेमिस्टर पूरी जान लगा के पढूंगा।
इंसान पढाई सिर्फ दो वजहों से ही करता है या तो शौक से या फिर डर से, शोक हमें पढाई का है नहीं और डरते हम किसी के बाप से भी नहीं.
समंदर भर सिलेबस होता है, नदी भर पढ़ पाते हैं, बाल्टी भर याद रहता है, चुल्लू भर नंबर आते हैं, जिसमें हम डूब जाते हैं.
निर्णय लेना और असफल हो जाना!! इससे एक बात तो स्पष्ट है!! की आप उस भीड़ का हिस्सा नहीं है!! जो असफल होने के डर से निर्णय ही नहीं ले पाते है!!
ना वक्त है इतना कि Syllabus पूरा किया जाएँ!! ना तरकीब कोई की Exam पास किया जाएँ!! न जाने कोन-सा दर्द दिया है इस पढ़ाई ने!! ना रोया जाए और ना सोया जाएँ!!