बचपन से ही शोख था hero बनने का पर!! क्या करूँ माँ ने बोला बेटा पहले पढ़ाई पूरा कर!! लेकिन gf ने बोला hero लग रहे हो!! उस दिन से hero बनने का सोख ही उतर गया!!
जहां दूसरों को समझाना मुश्किल हो जाए!! वहां खुद को समझा लेना बेहतर होता है!!
इंसान पढाई सिर्फ दो वजहों से ही करता है या तो शौक से या फिर डर से, शोक हमें पढाई का है नहीं और डरते हम किसी के बाप से भी नहीं.
समंदर भर सिलेबस होता है, नदी भर पढ़ पाते हैं, बाल्टी भर याद रहता है, चुल्लू भर नंबर आते हैं, जिसमें हम डूब जाते हैं.
क्या आप को पता है.. बुक्स सामने रख कर बी न पढ़ पाने वाली बीमारी का नाम क्या है.. मोबाइल
क्रिकेट खेला करो!! अनुष्का मिलेगी!! पढ़ाई लिखाई से तो!! मंजुडी, संजुडी, ही मिलेगी!!
बचपन से ही शोख था hero बनने का पर!! क्या करूँ माँ ने बोला बेटा पहले पढ़ाई पूरा कर!! लेकिन gf ने बोला hero लग रहे हो!! उस दिन से hero बनने का सोख ही उतर गया!!
जहां दूसरों को समझाना मुश्किल हो जाए!! वहां खुद को समझा लेना बेहतर होता है!!
इंसान पढाई सिर्फ दो वजहों से ही करता है या तो शौक से या फिर डर से, शोक हमें पढाई का है नहीं और डरते हम किसी के बाप से भी नहीं.
समंदर भर सिलेबस होता है, नदी भर पढ़ पाते हैं, बाल्टी भर याद रहता है, चुल्लू भर नंबर आते हैं, जिसमें हम डूब जाते हैं.
क्या आप को पता है.. बुक्स सामने रख कर बी न पढ़ पाने वाली बीमारी का नाम क्या है.. मोबाइल
क्रिकेट खेला करो!! अनुष्का मिलेगी!! पढ़ाई लिखाई से तो!! मंजुडी, संजुडी, ही मिलेगी!!