जो नींद एग्जाम की रात आती हे वो नींद तो नींद की गोली खाने के बाद भी नहीं आती।
मैं ये सोचकर पेपर खाली छोड़ आया हूं कि कही टीचर ये ना कहे की बड़ों को जवाब देता है ।
इंसान पढाई सिर्फ दो वजहों से ही करता है या तो शौक से या फिर डर से, शोक हमें पढाई का है नहीं और डरते हम किसी के बाप से भी नहीं.
समंदर भर सिलेबस होता है, नदी भर पढ़ पाते हैं, बाल्टी भर याद रहता है, चुल्लू भर नंबर आते हैं, जिसमें हम डूब जाते हैं.
यह एग्जाम का रिश्ता भी अजीब होता हैं!! सब अपना-अपना नसीब होता हैं!! रह जाता हैं जो निगाहों से दूर!! वही प्रश्न कम्पलसरी हो जाता हैं!!
मैं एग्जाम में फ़ैल नहीं हुवा बस मेरी डिग्री कुछ समय के लिए पोस्टपोन हो गयी हैं ।
जो नींद एग्जाम की रात आती हे वो नींद तो नींद की गोली खाने के बाद भी नहीं आती।
मैं ये सोचकर पेपर खाली छोड़ आया हूं कि कही टीचर ये ना कहे की बड़ों को जवाब देता है ।
इंसान पढाई सिर्फ दो वजहों से ही करता है या तो शौक से या फिर डर से, शोक हमें पढाई का है नहीं और डरते हम किसी के बाप से भी नहीं.
समंदर भर सिलेबस होता है, नदी भर पढ़ पाते हैं, बाल्टी भर याद रहता है, चुल्लू भर नंबर आते हैं, जिसमें हम डूब जाते हैं.
यह एग्जाम का रिश्ता भी अजीब होता हैं!! सब अपना-अपना नसीब होता हैं!! रह जाता हैं जो निगाहों से दूर!! वही प्रश्न कम्पलसरी हो जाता हैं!!
मैं एग्जाम में फ़ैल नहीं हुवा बस मेरी डिग्री कुछ समय के लिए पोस्टपोन हो गयी हैं ।