हर युग में ऐसा होता है!! हर स्टूडेंट इश्क में खोता है!!
जो नींद एग्जाम की रात आती हैं!! वो नींद “नींद” की गोली खाने से भी नहीं आती हैं!!
जोर का झटका हाय जोरो से लगा, पढाई बन गयी उम्र कैद की सजा, ये हे उदासी जान की प्यासी, एग्जाम से अच्छा दे दो फसी, कॉपी मिलेना छुपाओ ऐसी जगह।
ना वक्त है इतना कि Syllabus पूरा किया जाएँ!! ना तरकीब कोई की Exam पास किया जाएँ!! न जाने कोन-सा दर्द दिया है इस पढ़ाई ने!! ना रोया जाए और ना सोया जाएँ!!
निर्णय लेना और असफल हो जाना!! इससे एक बात तो स्पष्ट है!! की आप उस भीड़ का हिस्सा नहीं है!! जो असफल होने के डर से निर्णय ही नहीं ले पाते है!!
अगर एक अकेला टीचर सारे विषय नहीं पढ़ा सकता तो! ऐसी उम्मीद क्यों करते हैं कि एक विद्यार्थी सारे विषय पढ़े! “जागो बच्चों जागो”
हर युग में ऐसा होता है!! हर स्टूडेंट इश्क में खोता है!!
जो नींद एग्जाम की रात आती हैं!! वो नींद “नींद” की गोली खाने से भी नहीं आती हैं!!
जोर का झटका हाय जोरो से लगा, पढाई बन गयी उम्र कैद की सजा, ये हे उदासी जान की प्यासी, एग्जाम से अच्छा दे दो फसी, कॉपी मिलेना छुपाओ ऐसी जगह।
ना वक्त है इतना कि Syllabus पूरा किया जाएँ!! ना तरकीब कोई की Exam पास किया जाएँ!! न जाने कोन-सा दर्द दिया है इस पढ़ाई ने!! ना रोया जाए और ना सोया जाएँ!!
निर्णय लेना और असफल हो जाना!! इससे एक बात तो स्पष्ट है!! की आप उस भीड़ का हिस्सा नहीं है!! जो असफल होने के डर से निर्णय ही नहीं ले पाते है!!
अगर एक अकेला टीचर सारे विषय नहीं पढ़ा सकता तो! ऐसी उम्मीद क्यों करते हैं कि एक विद्यार्थी सारे विषय पढ़े! “जागो बच्चों जागो”