मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की, कोई किसी का नही…? लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए…

मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की, कोई किसी का नही…? लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए…

Share:

More Like This

दुनिया बहुत स्वार्थी है, जबतक हमसे कोई काम होता है, तबतक दुनिया हमे पूछती है, और जब हमसे कोई काम नहीं होता, तब दुनिया हमारे बारे मे सोचती भी नहीं।

अपनों के लिए हार स्वीकार लेना हमे मंजूर है, लेकिन बात तो यही है कि अपने ही हमे हारने पर मजबूर कर देते है।

दोस्त भी दुश्मन बन जाता है, जब उसे अपना स्वार्थ नजर आता है।

मज़बूत होने में मज़ा ही तब है, जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

दुनिया बहुत स्वार्थी है, जबतक हमसे कोई काम होता है, तबतक दुनिया हमे पूछती है, और जब हमसे कोई काम नहीं होता, तब दुनिया हमारे बारे मे सोचती भी नहीं।

अपनों के लिए हार स्वीकार लेना हमे मंजूर है, लेकिन बात तो यही है कि अपने ही हमे हारने पर मजबूर कर देते है।

दोस्त भी दुश्मन बन जाता है, जब उसे अपना स्वार्थ नजर आता है।

मज़बूत होने में मज़ा ही तब है, जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ