इतिहास गवा है, जितना धोका दुश्मनों से नहीं हुआ उतना धोखा दोस्तों से हुआ है।
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे
जहाँ भरोसा है वहाँ सावधानी जरूर होनी चाहिए।
मज़बूत होने में मज़ा ही तब है, जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..
जब हमने ऊपर उठने की कोशिश की तो पीछे खिचने वाले वो ही लोग थे, जिन्हे हम अपना समझ बैठे थे।
कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!
इतिहास गवा है, जितना धोका दुश्मनों से नहीं हुआ उतना धोखा दोस्तों से हुआ है।
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे
जहाँ भरोसा है वहाँ सावधानी जरूर होनी चाहिए।
मज़बूत होने में मज़ा ही तब है, जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..
जब हमने ऊपर उठने की कोशिश की तो पीछे खिचने वाले वो ही लोग थे, जिन्हे हम अपना समझ बैठे थे।
कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!