दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।
लोगों का उसूल है जबतक पैसा है तब तक रिश्ता है।
जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
लोग अब ईमानदार नहीं बेईमान हो गए है, जिस दिल मे रहते है उसी दिल को ठेस पहुँचाते है।
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे
दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।
लोगों का उसूल है जबतक पैसा है तब तक रिश्ता है।
जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
लोग अब ईमानदार नहीं बेईमान हो गए है, जिस दिल मे रहते है उसी दिल को ठेस पहुँचाते है।
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे