जब हमने ऊपर उठने की कोशिश की तो पीछे खिचने वाले वो ही लोग थे, जिन्हे हम अपना समझ बैठे थे।
दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।
सच्चे लोगों के साथ सच्ची बात करे, और मतलबी लोगों के साथ सिर्फ मतलब की बात करे।
मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की, कोई किसी का नही…? लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए…
देख के दुनिया अब हम भी बदलेंगे मिजाज़ रिश्ता सब से होगा लेकिन वास्ता किसी से नहीं
दोस्त भी दुश्मन बन जाता है, जब उसे अपना स्वार्थ नजर आता है।
जब हमने ऊपर उठने की कोशिश की तो पीछे खिचने वाले वो ही लोग थे, जिन्हे हम अपना समझ बैठे थे।
दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।
सच्चे लोगों के साथ सच्ची बात करे, और मतलबी लोगों के साथ सिर्फ मतलब की बात करे।
मतलबी दुनिया में लोग अफसोस से कहते है की, कोई किसी का नही…? लेकीन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए…
देख के दुनिया अब हम भी बदलेंगे मिजाज़ रिश्ता सब से होगा लेकिन वास्ता किसी से नहीं
दोस्त भी दुश्मन बन जाता है, जब उसे अपना स्वार्थ नजर आता है।