कैसे करू भरोसा गैरो के प्यार पर, अपने ही मजा लेते अपनो की हार पर

कैसे करू भरोसा गैरो के प्यार पर, अपने ही मजा लेते अपनो की हार पर

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मज़बूत होने में मज़ा ही तब है, जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!

कलयुग का दर्शन करना चाहते हो तो एक मतलबी दोस्त बनाकर देखो, कलयुग का दर्शन उसके अंदर ही हो जाएगा।

दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।

लोग अब ईमानदार नहीं बेईमान हो गए है, जिस दिल मे रहते है उसी दिल को ठेस पहुँचाते है।

मज़बूत होने में मज़ा ही तब है, जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो..

मुखौटे बचपन में देखे थे मेले में टंगे हुए समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे है चढ़े हुऐ

कुछ यूँ हुआ कि.जब भी जरुरत पड़ी मुझे हर शख्स इतेफाक से.मजबूर हो गया !!

कलयुग का दर्शन करना चाहते हो तो एक मतलबी दोस्त बनाकर देखो, कलयुग का दर्शन उसके अंदर ही हो जाएगा।

दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।

लोग अब ईमानदार नहीं बेईमान हो गए है, जिस दिल मे रहते है उसी दिल को ठेस पहुँचाते है।