सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....
मेरी जेब मे जरा सा छेद क्या हो गया, सिक्को से ज्यादा तो रिश्ते गिर गए .
चेहरा तो मिल ही जाएगा हमसे भी खुबसूरत पर जब बात दिल की आएगी ना तो हार जाओगे तुम
अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..
दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है
"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."
सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....
मेरी जेब मे जरा सा छेद क्या हो गया, सिक्को से ज्यादा तो रिश्ते गिर गए .
चेहरा तो मिल ही जाएगा हमसे भी खुबसूरत पर जब बात दिल की आएगी ना तो हार जाओगे तुम
अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..
दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है
"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."