हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..
क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं
हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..
क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं