मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
तुझे जाना था तो हमने जाने दिया तुझे,, इससे बढ़कर और क्या वफा करते हम।
जब कोई आपकी नाराज़गी की फ़िक्र करना छोड़ दे तो समझ लेना रिश्ता ख़तम मजबूरी शुरू
युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
उस हस्ती तस्वीर को क्या मालूम, उसे देखकर कितना रोया जाता है
मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है
तुझे जाना था तो हमने जाने दिया तुझे,, इससे बढ़कर और क्या वफा करते हम।
जब कोई आपकी नाराज़गी की फ़िक्र करना छोड़ दे तो समझ लेना रिश्ता ख़तम मजबूरी शुरू
युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
उस हस्ती तस्वीर को क्या मालूम, उसे देखकर कितना रोया जाता है