कुछ लोग से आज कुछ तो सीखा, पहले अपने जैसा बनाते हैं ये, फिर अकेला छोड़ देते है ||
सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !
मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी
बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
कुछ लोग से आज कुछ तो सीखा, पहले अपने जैसा बनाते हैं ये, फिर अकेला छोड़ देते है ||
सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !
मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी
बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं