क़दर करना सीख लो कहीं कोई थक ही न जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते

क़दर करना सीख लो कहीं कोई थक ही न जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते

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बेशक खूबसूरत तो वो आज भी है, लेकिन चेहरे पर वो मुस्कान नहीं, जो हम लाया करते थे…!

“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

पसंद ना आए मेरा साथ तो बता देना महसूस भी नहीं कर पाओगे उतना दूर चले जाएंगे .

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

बेशक खूबसूरत तो वो आज भी है, लेकिन चेहरे पर वो मुस्कान नहीं, जो हम लाया करते थे…!

“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

पसंद ना आए मेरा साथ तो बता देना महसूस भी नहीं कर पाओगे उतना दूर चले जाएंगे .

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."