सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते
मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया
मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।
नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते
मैंने दोस्ती माँगी थी वो इश्क़ देकर बर्बाद कर गया
मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..