क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
वो जो हमसे नफरत करते हैं, हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,
उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..
एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में
क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
वो जो हमसे नफरत करते हैं, हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,
उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..
एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में