सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

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नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते

जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं…!

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं, अक्सर उन्हीं की किस्मत खराब होती है

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते

जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं…!

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

जिनके दिल बहुत अच्छे होते हैं, अक्सर उन्हीं की किस्मत खराब होती है

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!