टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
मुझे हँसता हुआ देखा तो परेशान सा लगा....वह तो रिस्ते हुये जख्म देखने आया था मेरे...
बेवजा बेवफाओ को याद किये हैं, गलत लोगों पे बहुत वक़्त बरदाद किये हैं.
जो कदर नहीं करता उसके लिए तुम रोते हो, जो तुम्हरी कदर करता है तुम रुलाते हो
टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है
सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
मुझे हँसता हुआ देखा तो परेशान सा लगा....वह तो रिस्ते हुये जख्म देखने आया था मेरे...
बेवजा बेवफाओ को याद किये हैं, गलत लोगों पे बहुत वक़्त बरदाद किये हैं.
जो कदर नहीं करता उसके लिए तुम रोते हो, जो तुम्हरी कदर करता है तुम रुलाते हो