सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

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कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना

सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

कुछ पल निकाल लिया करो मेरे लिए भी, दिल बहुत उदास रहता है जब तुमसे बात नहीं होती

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

बेशक खूबसूरत तो वो आज भी है, लेकिन चेहरे पर वो मुस्कान नहीं, जो हम लाया करते थे…!

सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.

कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना

सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

कुछ पल निकाल लिया करो मेरे लिए भी, दिल बहुत उदास रहता है जब तुमसे बात नहीं होती

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

बेशक खूबसूरत तो वो आज भी है, लेकिन चेहरे पर वो मुस्कान नहीं, जो हम लाया करते थे…!

सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.