मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

Share:

More Like This

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

बहुत देर करदी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने मे ..! वोह दिल निलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हरी थी !

जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले

आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है

हमे देखकर..अनदेखा कर दिया उसने, बंद आंखों से पहचानने का, कभी दावा किया था जिसने

सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

बहुत देर करदी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने मे ..! वोह दिल निलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हरी थी !

जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले

आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है

हमे देखकर..अनदेखा कर दिया उसने, बंद आंखों से पहचानने का, कभी दावा किया था जिसने