एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है.
क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..
उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं तेरे दिल मे हूँ पर तेरे पास नहीं वैसे तो सब कुछ आ मेरे पास पर तेरे जैसा कोई खास नहीं
वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक़त किसी और के साथ बिताने लगे हैं
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है.
क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..
उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं तेरे दिल मे हूँ पर तेरे पास नहीं वैसे तो सब कुछ आ मेरे पास पर तेरे जैसा कोई खास नहीं
वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक़त किसी और के साथ बिताने लगे हैं
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?