हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|
किसी के बुरे प्रभाव से खुद को छिपाए रखना क्योंकि तुझे मंजिल के सफर में कायम है रहना इससे पहले कि कुछ गलत हो जाए, खुद को धोखे के जहर से बचाए रखना!!
उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..
नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..
हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है एक दिन रात उदास होगी और हम गुज़र जाएंगे
हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|
किसी के बुरे प्रभाव से खुद को छिपाए रखना क्योंकि तुझे मंजिल के सफर में कायम है रहना इससे पहले कि कुछ गलत हो जाए, खुद को धोखे के जहर से बचाए रखना!!
उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..
नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
दिल के रिश्ते कभी नहीं टूटते.. बस खामोश हो जाते है..
हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है एक दिन रात उदास होगी और हम गुज़र जाएंगे