उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही

उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही

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सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....

तुम बदले तो हम भी कहां पुराने से रहे, तुम आने से रहे तो हम भी बुलाने से रहे.

मेरे मरने पर तो रोने वाले बहुत हैं तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....

तुम बदले तो हम भी कहां पुराने से रहे, तुम आने से रहे तो हम भी बुलाने से रहे.

मेरे मरने पर तो रोने वाले बहुत हैं तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए

मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी

सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं