तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…
सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना न समझा, जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है
किसी के बुरे प्रभाव से खुद को छिपाए रखना क्योंकि तुझे मंजिल के सफर में कायम है रहना इससे पहले कि कुछ गलत हो जाए, खुद को धोखे के जहर से बचाए रखना!!
दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…
सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना न समझा, जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है
किसी के बुरे प्रभाव से खुद को छिपाए रखना क्योंकि तुझे मंजिल के सफर में कायम है रहना इससे पहले कि कुछ गलत हो जाए, खुद को धोखे के जहर से बचाए रखना!!
दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है