सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
ज़िंदगी रही तो हर दिन तुम्हे याद करते रहेगे, भूल गया तो समझ लेना खुदा ने हमे याद कर लिया..
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
ज़िंदगी रही तो हर दिन तुम्हे याद करते रहेगे, भूल गया तो समझ लेना खुदा ने हमे याद कर लिया..
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं