अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

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हद है यार.. प्यार भी हम ही करे, निभाए भी हम ही और छोड़ कर वो चला जाए तो रोये भी हम ही..

जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे

बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो, कभी पहले टूटा नहीं क्या?

तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे

चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं.. रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं..

हद है यार.. प्यार भी हम ही करे, निभाए भी हम ही और छोड़ कर वो चला जाए तो रोये भी हम ही..

जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे

बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो, कभी पहले टूटा नहीं क्या?

तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे

चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं.. रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं..