अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

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सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!

कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

बहुत देर करदी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने मे ..! वोह दिल निलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हरी थी !

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!

सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से ..!

कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

बहुत देर करदी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने मे ..! वोह दिल निलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हरी थी !

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!