अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

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तुमसे अच्छे मेरे दुश्मन निकले... हर बात पे कहते है 'तुझे नहीं छोड़ेगे'

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!

दिल भी एक जिद पर अड़ा है किसी बच्चे की तरह, या तो सब कुछ ही चाहिए या कुछ भी नही

तुमसे अच्छे मेरे दुश्मन निकले... हर बात पे कहते है 'तुझे नहीं छोड़ेगे'

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!

मौत आये तो शायद दिन सवर जाए वरना ज़िंदगी ने तो मार ही डाला है

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!

दिल भी एक जिद पर अड़ा है किसी बच्चे की तरह, या तो सब कुछ ही चाहिए या कुछ भी नही