अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

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कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.

दिल भी एक जिद पर अड़ा है किसी बच्चे की तरह, या तो सब कुछ ही चाहिए या कुछ भी नही

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ

आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.

दिल भी एक जिद पर अड़ा है किसी बच्चे की तरह, या तो सब कुछ ही चाहिए या कुछ भी नही

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ

आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है