अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

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जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

हमे बुरा न समझो जनाब हम दर्द लिखते है देते नहीं.

एक सवाल था तुझसे क्या तुझे सच मैं प्यार था मुझसे.

तुम ठहर नहीं सकते... जानती हूँ.... मगर.. मैं तो तुम्हारे साथ... चल सकती हूँ ना

दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

हमे बुरा न समझो जनाब हम दर्द लिखते है देते नहीं.

एक सवाल था तुझसे क्या तुझे सच मैं प्यार था मुझसे.

तुम ठहर नहीं सकते... जानती हूँ.... मगर.. मैं तो तुम्हारे साथ... चल सकती हूँ ना

दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है