अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

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ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

दिल में रहते हैं कुछ लोग ... जिनका नाम ज़ुबान से लेना ठीक नहीं होता

लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद अच्छे इंसान से बदला लेते हैं

झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता, मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने

ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता

गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

दिल में रहते हैं कुछ लोग ... जिनका नाम ज़ुबान से लेना ठीक नहीं होता

लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद अच्छे इंसान से बदला लेते हैं

झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता, मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने