मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
ब्लॉक कर दे मुझको वरना प्यार हो जायेगा तुझको
नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
ब्लॉक कर दे मुझको वरना प्यार हो जायेगा तुझको
नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं