हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही
नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .
हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही
नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .