क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
दिल उसके इंतज़ार में डूबा है. जो किसी और की चाहत में डूबा है.
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
एक बात कहु जिनसे बात करने की आदत हो जाती है है ना, उनसे अगर एक दिन बात न हो तो दिल उदास हो जाता है
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
दिल उसके इंतज़ार में डूबा है. जो किसी और की चाहत में डूबा है.
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
एक बात कहु जिनसे बात करने की आदत हो जाती है है ना, उनसे अगर एक दिन बात न हो तो दिल उदास हो जाता है