जरा देखो तो, ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है! 'इश्क' हो तो कहना, अब दिल यहाँ नहीं रहता…
ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता
जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |
जरा देखो तो, ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है! 'इश्क' हो तो कहना, अब दिल यहाँ नहीं रहता…
ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता
जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |