दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक़त किसी और के साथ बिताने लगे हैं
मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता
दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक़त किसी और के साथ बिताने लगे हैं
मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता