ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली जरा सी हवा क्या लग गई हवा में उडने लगी

ये पतंग भी बिल्कुल तुम्हारी तरह निकली जरा सी हवा क्या लग गई हवा में उडने लगी

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कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं

सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया

कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं

सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है

हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया