उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

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शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…

थम के रह जाती है ज़िंदगी जब जम के बरसती है पुरानी यादें

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में

किसी के दिल का दर्द किसने देखा है, देखा है तो सिर्फ चेहरा देखा है, दर्द तो तन्हाई मे होता है, लेकिन इन तन्हाइयों मे लोगो ने हमे हसते हुए देखा है !

जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं

रिश्ते वेहम से भी ख़तम हो जाते हैं, अक्सर क़ुसूर हमेशा गलतियों का नहीं होता

शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…

थम के रह जाती है ज़िंदगी जब जम के बरसती है पुरानी यादें

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में

किसी के दिल का दर्द किसने देखा है, देखा है तो सिर्फ चेहरा देखा है, दर्द तो तन्हाई मे होता है, लेकिन इन तन्हाइयों मे लोगो ने हमे हसते हुए देखा है !

जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं

रिश्ते वेहम से भी ख़तम हो जाते हैं, अक्सर क़ुसूर हमेशा गलतियों का नहीं होता