हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
तुझे जाना था तो हमने जाने दिया तुझे,, इससे बढ़कर और क्या वफा करते हम।
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
क्यूँ दुनिया वाले प्यार को ईश्वर का दर्जा देते है ? मैंने तो आज तक नहीं सुना कि ईश्वर ने बेवफ़ाई की हो !!
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी
तुझे जाना था तो हमने जाने दिया तुझे,, इससे बढ़कर और क्या वफा करते हम।
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
क्यूँ दुनिया वाले प्यार को ईश्वर का दर्जा देते है ? मैंने तो आज तक नहीं सुना कि ईश्वर ने बेवफ़ाई की हो !!
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं