"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

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अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

उसके बदलने का कोई दुःख नहीं, बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूं

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

ज़िन्दगी में कुछ लोग ऐसे भी आते हैं हँसाते – रूलाते और देखते ही देखते दिल में बस जाते हैं फिर दूर जाने के बाद याद बहुत आते हैं ..

जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही मानता..दिल बात नही मानता।

कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

उसके बदलने का कोई दुःख नहीं, बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूं

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

ज़िन्दगी में कुछ लोग ऐसे भी आते हैं हँसाते – रूलाते और देखते ही देखते दिल में बस जाते हैं फिर दूर जाने के बाद याद बहुत आते हैं ..

जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही मानता..दिल बात नही मानता।

कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।