जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं
मेरे मरने पर तो लाखो रोने वाले है, तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए
कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे धीरे .. तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है .
जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं
मेरे मरने पर तो लाखो रोने वाले है, तलाश उसकी है जो मेरे रोने से मर जाए
कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे धीरे .. तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है .