जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ
जब कोई आपकी नाराज़गी की फ़िक्र करना छोड़ दे तो समझ लेना रिश्ता ख़तम मजबूरी शुरू
जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |
चलो खामोशियों की गिरफत में चलते हैं, बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जाएंगे
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ
जब कोई आपकी नाराज़गी की फ़िक्र करना छोड़ दे तो समझ लेना रिश्ता ख़तम मजबूरी शुरू
जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |
चलो खामोशियों की गिरफत में चलते हैं, बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जाएंगे
हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था