रुलाती है मगर रोने का नहीं.
नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते
सिर्फ एक बहाने की तलाश होती है निभाने वाले को भी, और जाने वाले को भी
जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |
अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .
अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !
रुलाती है मगर रोने का नहीं.
नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते
सिर्फ एक बहाने की तलाश होती है निभाने वाले को भी, और जाने वाले को भी
जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |
अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .
अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !