मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....

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खुद से होती है जाने शिकायतें कितनी.....जिन्हें किसी से.... कोई शिकायत नहीं होती

"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..

वो जो हमसे नफरत करते हैं, हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,

वास्ता नहीं रखना तो नजर क्यूँ रखते हो... हम किस हाल मे हैं ये खबर क्यूँ रखते हो...Black heart

खुद से होती है जाने शिकायतें कितनी.....जिन्हें किसी से.... कोई शिकायत नहीं होती

"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..

वो जो हमसे नफरत करते हैं, हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,

वास्ता नहीं रखना तो नजर क्यूँ रखते हो... हम किस हाल मे हैं ये खबर क्यूँ रखते हो...Black heart