आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..
तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे
जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!
मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ..... कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है
आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..
तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे
जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!
मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ..... कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है