मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
चारो और देख लिया मैंने ना मुझे मेरा कोई दिखा ना मेरे जैसा कोई दिखा।
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
"तुने तो कहा था, हर शाम गुज़रेगी तेरे साथ। तू बदल गई, या तेरे शहर मेँ शाम नहीँ होती।"
मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं..
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
चारो और देख लिया मैंने ना मुझे मेरा कोई दिखा ना मेरे जैसा कोई दिखा।
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
"तुने तो कहा था, हर शाम गुज़रेगी तेरे साथ। तू बदल गई, या तेरे शहर मेँ शाम नहीँ होती।"