क्या औकात है तेरी ए ज़िंदगी.. चार दिन की मोहब्बत तुझे बरबाद कर देती है..

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मेरे मरने पर किसी को ज्यादा फर्क नहीं होगा, बस तन्हाई रोएगी कि मेरा हमसफ़र चला गया....

तुमसे अच्छे मेरे दुश्मन निकले... हर बात पे कहते है 'तुझे नहीं छोड़ेगे'

क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

जिन्हे भी मुझसे मिलने का वक़्त नहीं मिलता देख लेना एक दिन होगा जब मैं इतना दूर चला जाऊंगा की तुम्हे मुझसे मिलने का मौका भी नहीं मिलेगा।

जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो

मेरे मरने पर किसी को ज्यादा फर्क नहीं होगा, बस तन्हाई रोएगी कि मेरा हमसफ़र चला गया....

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जिन्हे भी मुझसे मिलने का वक़्त नहीं मिलता देख लेना एक दिन होगा जब मैं इतना दूर चला जाऊंगा की तुम्हे मुझसे मिलने का मौका भी नहीं मिलेगा।

जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो