दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है

दिमाग पर ज़ोर लगाकर गिनते हो गलतियां मेरी कभी दिल पर हाथ रख के पूछना कसूर किसका है

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हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था

मुझे हँसता हुआ देखा तो परेशान सा लगा....वह तो रिस्ते हुये जख्म देखने आया था मेरे...

बहुत तकलीफ होती है उस वक़्त जब तुम सब से बात करते हो सिर्फ मुझे छोड़ कर.

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था

मुझे हँसता हुआ देखा तो परेशान सा लगा....वह तो रिस्ते हुये जख्म देखने आया था मेरे...

बहुत तकलीफ होती है उस वक़्त जब तुम सब से बात करते हो सिर्फ मुझे छोड़ कर.

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे

जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना