जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?
मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.
आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.
हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|
जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......
माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं
उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?
मत कर मोहबत तेरे बस की बात नही जो दर्द मेरे पास है, उस दर्द की दवा तेरे पास नही.
आज आयी है मेरी याद उसे ज़रूर फिर किसी ने उसे ठुकराया होगा.
हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते हैं| हम इसी वास्ते हर सख्स से कम मिलते हैं|