हजारो मे मुझे सिर्फ एक वो सख्स चाहिए जो मेरी गैर मौजूदगी मे मेरी बुराई न सुन सके

हजारो मे मुझे सिर्फ एक वो सख्स चाहिए जो मेरी गैर मौजूदगी मे मेरी बुराई न सुन सके

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बहुत तकलीफ होती है उस वक़्त जब तुम सब से बात करते हो सिर्फ मुझे छोड़ कर.

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.

जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.

बहुत तकलीफ होती है उस वक़्त जब तुम सब से बात करते हो सिर्फ मुझे छोड़ कर.

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |

कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियो से बोझ थे हम तुम्हारे उपर.

जिनसे दूर नहीं रह पाते, उन्हें से से दूर हो जाते हैं.