हजारो मे मुझे सिर्फ एक वो सख्स चाहिए जो मेरी गैर मौजूदगी मे मेरी बुराई न सुन सके

हजारो मे मुझे सिर्फ एक वो सख्स चाहिए जो मेरी गैर मौजूदगी मे मेरी बुराई न सुन सके

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गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

चलो खामोशियों की गिरफत में चलते हैं, बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जाएंगे

देख लिया खुद को बिजी रख कर भी फिर भी याद सिर्फ तुम्हारी आती हैं.

साथी तो मुझे अपने सुख के लिए चाहिए दुखों के लिए तो मैं अकेला काफी हूँ !!

मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई

कुछ अलग सा है अपनी मौहबत का हाल... तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।

चलो खामोशियों की गिरफत में चलते हैं, बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जाएंगे

देख लिया खुद को बिजी रख कर भी फिर भी याद सिर्फ तुम्हारी आती हैं.

साथी तो मुझे अपने सुख के लिए चाहिए दुखों के लिए तो मैं अकेला काफी हूँ !!

मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई

कुछ अलग सा है अपनी मौहबत का हाल... तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!