हजारो मे मुझे सिर्फ एक वो सख्स चाहिए जो मेरी गैर मौजूदगी मे मेरी बुराई न सुन सके

हजारो मे मुझे सिर्फ एक वो सख्स चाहिए जो मेरी गैर मौजूदगी मे मेरी बुराई न सुन सके

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सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.

माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!

सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं

शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.

माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं

"आँखों से हाल पूछा दिल का, एक बूंद टपक पड़ी लहू की..."

कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

ज़हर का भी अपना हिसाब है, मरने के लिए थोड़ा सा और जीने के लिए बहुत सारा पीना पड़ता है.!