मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
उसकी मेरी दोस्ती थी तो कमाल की, पर नाम दे के उसने सब बर्बाद कर दिया...!!
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
पसंद ना आए मेरा साथ तो बता देना महसूस भी नहीं कर पाओगे उतना दूर चले जाएंगे .
मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
उसकी मेरी दोस्ती थी तो कमाल की, पर नाम दे के उसने सब बर्बाद कर दिया...!!
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
पसंद ना आए मेरा साथ तो बता देना महसूस भी नहीं कर पाओगे उतना दूर चले जाएंगे .