जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही मानता..दिल बात नही मानता।

जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही मानता..दिल बात नही मानता।

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कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये

कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…….. ।।

खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

कभी कभी इंसान ना टूटता है ना बिखरता है बस हार जाता है कभी किस्मत से तो कभी अपनों से

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये

कोई नही आऐगा मेरी जिदंगी मे तुम्हारे सिवा, एक मौत ही है जिसका मैं वादा नही करता…….. ।।

खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

कभी कभी इंसान ना टूटता है ना बिखरता है बस हार जाता है कभी किस्मत से तो कभी अपनों से

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !