रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .

रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .

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कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये

“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए

हमने भी एक ऐसे इंसान को चाहा, जिसे भूलना हमारे बस में नहीं और पाना किस्मत में नहीं.

कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये

“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए

हमने भी एक ऐसे इंसान को चाहा, जिसे भूलना हमारे बस में नहीं और पाना किस्मत में नहीं.