रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .

रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी .

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कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

वास्ता नहीं रखना तो नजर क्यूँ रखते हो... हम किस हाल मे हैं ये खबर क्यूँ रखते हो...Black heart

लिखूं तो कुछ ऐसा जिसे पढ़ वह रोए भी ना और रात भर सोए भी ना

वो जा रहा है छोड़ कर..बताओ रास्ता दूँ या वास्ता दूँ...?

दर्द सहते सहते इंसान सिर्फ हसना नहीं रोना भी छोड़ देता है

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।

कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!

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किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम.. चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।