कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

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अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके

क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है

अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता

रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके

क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है