कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

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हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा

अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

जब लोगों के दिल भर जाते हैं..... तो दूर जाने के बहाने अपने आप मिल जाते हैं.....!

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा

अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

जब लोगों के दिल भर जाते हैं..... तो दूर जाने के बहाने अपने आप मिल जाते हैं.....!

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं