बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

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युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो

सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये, वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

दिल उसके इंतज़ार में डूबा है. जो किसी और की चाहत में डूबा है.

गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था की, ‘किमत चेहरों की होती है’ !

हम नादान थे जो उसे हमसफ़र समझ बैठे जो चलती थी साथ मेरे पर तलाश उसे किसी और की थी

दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो

सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये, वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

दिल उसके इंतज़ार में डूबा है. जो किसी और की चाहत में डूबा है.

गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .