बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

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क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ..... कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही

क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ..... कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही